अशोक कुमार सिन्हा

लेखक, कवि, कला समीक्षक एवं अपर  निदेशक, बिहार संग्रहालय, पटना

ashok kumar singh with draupati murmu
ashok kumar singh
अशोक कुमार सिन्हा के बारे में

कला-संवेदना से लोक संस्कृति तक: अशोक कुमार सिन्हा की रचनात्मक यात्रा

अशोक कुमार सिन्हा वर्तमान में बिहार संग्रहालय, पटना में अपर निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
इससे पहले उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान, पटना के निदेशक और बिहार राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, पटना के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी रह चुके हैं।

बिहार की लोककलाओं और हस्तशिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान है।

कला और साहित्य पर अब तक इनकी 40 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें प्रमुख हैं: 

  • बटोही, सुन लो हमरी बात (उपन्यास)
  • पिता (खंड-काव्य)
  • बैरी पईसवा हो राम
  • मवाली की बेटियाँ (कहानी संग्रह)
  • बिहार के पद्मश्री कलाकार (जीवनी)
  • पद्मश्री ब्रह्मदेव राम पंडित– भोरमबाग से भयंदर (जीवनी)
  • मन तो पंछी भया (यात्रा संस्मरण)

इनकी 11 पुस्तकें महापुरुषों की जीवनी पर और 10 पुस्तकें कला-संस्कृति पर आधारित हैं।

साहित्यिक उपलब्धियों के लिए इन्हें अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ सम्मान (2014 -15)
  • नई धारा सम्मान (2024)
  • बिहार सरकार का राजभाषा सम्मान (2014-15)
  • बिहार सरकार दिनकर कला लेखन सम्मान (2019-20)

विशिष्ट हस्तियों के साथ कुछ पल

यह खंड अशोक कुमार सिन्हा द्वारा कला और संस्कृति की कुछ सबसे सम्मानित हस्तियों के साथ साझा किए गए यादगार और प्रेरणादायक क्षणों को दर्शाता है। ये मुलाक़ातें उनकी कला और अमूल्य योगदान के प्रति उनके गहरे सम्मान का प्रमाण हैं।

Smt. Droupadi Murmu

श्रीमती द्रौपदी मुर्मु

  • भारत की राष्ट्रपति

श्रीमती द्रौपदी मुर्मु भारत की 15वीं राष्ट्रपति हैं और देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनका जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचीं, जो उनके संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। वे झारखंड की राज्यपाल भी रह चुकी हैं और जनसेवा के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है। उनका जीवन सादगी, ईमानदारी और सेवा भाव का प्रतीक है। शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय समाज के विकास के लिए उनका योगदान प्रेरणादायक है।

राजीव सेठी

  • एक भारतीय डिज़ाइनर, सीनोग्राफर और कला क्यूरेटर, जिन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।

राजीव सेठी एक अग्रणी डिज़ाइनर हैं, जो उपमहाद्वीप की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और उत्सव में अपने नवोन्मेषी योगदान के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सुविख्यात हैं। पिछले 35 से अधिक वर्षों से उन्होंने डिज़ाइन एवं वास्तुकला, प्रदर्शनियों और उत्सवों, प्रदर्शनों तथा प्रकाशन कार्यों के माध्यम से उन पारम्परिक शिल्प-कौशलों को समकालीन संदर्भों से जोड़ने के उपाय खोजे हैं, जो संवेदनशील शिल्पी समुदायों और रचनात्मक पेशेवरों से संबंधित हैं।

रवीश कुमार

  • वरिष्ठ भारतीय पत्रकार, लेखक और मीडिया व्यक्तित्व, जिन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

रवीश कुमार भारतीय पत्रकार, लेखक एवं मीडिया व्यक्तित्व हैं, जो अपनी निर्भीक और सूझबूझ भरी रिपोर्टिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। वे एनडीटीवी इंडिया में वरिष्ठ कार्यकारी संपादक के रूप में कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने ‘प्राइम टाइम’ जैसे चर्चित कार्यक्रमों की मेजबानी की। सामाजिक मुद्दों पर उनके विशेष ध्यान तथा निष्पक्ष पत्रकारिता हेतु उन्हें ‘रामन मैगसेसे पुरस्कार’ प्रदान किया गया, जो मीडिया में उनके साहस और नैतिकता का सम्मान है।

टोकियो हासेगावा

  • जापान स्थित मिथिला संग्रहालय के संस्थापक

टोकियो हासेगावा, जो मिथिला संग्रहालय के संस्थापक और निदेशक तथा भारत–जापान सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने वाली एनपीओ सोसाइटी के अध्यक्ष हैं, ने 1982 में मिथिला संग्रहालय की स्थापना की। वे “नमस्ते इंडिया” कार्यक्रम के आयोजन से भी जुड़े रहे हैं, जिसमें भारतीय नृत्य, संगीत, भोजन, पर्यटन और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया जाता है। यह कार्यक्रम पिछले 25 वर्षों से हर वर्ष टोक्यो में आयोजित किया जा रहा है।

पद्मश्री ब्रह्मदेव राम पंडित

  • पद्मश्री से सम्मानित सिरेमिक कलाकार

ब्रह्मदेव राम पंडित भारतीय स्टूडियो पॉटर और शिल्पकार हैं, जो मिट्टी के बर्तनों के निर्माण में अपनी विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध हैं। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2013 में ‘पद्मश्री’ सम्मान से अलंकृत किया। ब्रह्मदेव राम पंडित ने 1981 में महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के भयंदर नगर में ‘पंडित आर्ट सिरेमिक’ नामक एक विनिर्माण इकाई की स्थापना की, जो आरम्भ में सीमित स्तर पर संचालित होती थी

Padmshree Godawari Dutt duara Ashirwad Prapt Karte Hue.

पद्मश्री गोदावरी दत्त

  • मिथिला चित्रकला में पद्मश्री

गोदावरी दत्त उन कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने मिथिला पेंटिंग को लोकप्रिय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में। उनकी पेंटिंग्स जापान के मिथिला संग्रहालय में प्रदर्शित की गई हैं। गोदावरी दत्त की बेहतरीन कृतियों में से एक ‘त्रिशूल’ भी उसी संग्रहालय में प्रदर्शित की गई थी। वह अपनी प्रदर्शनी के लिए कई बार जापान गई हैं, जिनमें ओसाका टोक्यो, कोबे आदि प्रमुख स्थान हैं।

नामवर सिंह

  • एक भारतीय साहित्यिक आलोचक, भाषाविद्, शिक्षाविद् और सिद्धांतकार

नामवर सिंह भारतीय साहित्यालोचक, भाषाविद्, शिक्षाविद् एवं सिद्धान्तकार थे। उन्होंने अनेक विश्वविद्यालयों में हिन्दी साहित्य के प्राध्यापक के रूप में सेवाएँ दीं। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के ‘भारतीय भाषा केंद्र’ के संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष थे। इसके अतिरिक्त वे साप्ताहिक समाचार-पत्रिका ‘जनयुग’ तथा साहित्यिक आलोचना की प्रतिष्ठित हिन्दी पत्रिका ‘आलोचना’ के संपादक भी रहे।

मनोज तिवारी

  • एक भारतीय राजनेता, गायक और अभिनेता

मनोज तिवारी भारतीय गायक, अभिनेता, टीवी प्रस्तोता एवं राजनेता हैं। भोजपुरी सिनेमा और संगीत में उनके योगदान ने उन्हें अत्यधिक लोकप्रियता दिलाई, जिसके बाद वे सक्रिय राजनीति में प्रविष्ट हुए। वे सांसद के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रहे हैं। उनका बहुआयामी कार्यक्षेत्र भारतीय समाज में मनोरंजन और जनसेवा, दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का निर्माण करता है।

मालिनी अवस्थी

  • पद्मश्री से सम्मानित लोक गायिका

मालिनी अवस्थी भारतीय लोकगायिका तथा पद्मश्री सम्मान से अलंकृत कलाकार हैं, जिन्हें विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की लोकसंगीत परम्परा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित, वे ठुमरी, कजरी तथा भोजपुरी गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध हैं। विश्वभर में अपने आयोजनों एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने भारत की पारम्परिक लोकधरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पंकज त्रिपाठी

  • भारतीय अभिनेता

पंकज त्रिपाठी एक प्रशंसित भारतीय अभिनेता हैं, जो हिन्दी फ़िल्मों और वेब श्रृंखलाओं में अपने सशक्त अभिनय के लिए प्रसिद्ध हैं। दो राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार, एक आईफ़ा तथा फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार से सम्मानित पंकज त्रिपाठी ने गैंग्स ऑफ़ वासेपुर, स्त्री, न्यूटन और गुंजन सक्सेना जैसी फ़िल्मों में उल्लेखनीय भूमिकाएँ निभाई हैं। इसके साथ ही सेक्रेड गेम्स और क्रिमिनल जस्टिस जैसी प्रशंसित वेब श्रृंखलाओं में भी उनका अभिनय अत्यंत सराहा गया है।

केदारनाथ सिंह

  • एक प्रतिष्ठित आलोचक, कवि और निबंधकार

केदारनाथ सिंह हिन्दी के प्रमुख कवि थे। वे एक प्रतिष्ठित आलोचक एवं निबन्धकार भी थे। उन्हें उनकी काव्य-रचनाओं के लिए ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ (2013) तथा ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ (1989) से सम्मानित किया गया था। केदारनाथ सिंह की कविता सरल, दैनन्दिन भाषा तथा सहज बिम्बों के माध्यम से जटिल विषयों और अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने के लिए प्रसिद्ध है।

Syed Shahnawaz Hussain

सैयद शाहनवाज़ हुसैन

  • भारतीय राजनेता

सैयद शाहनवाज़ हुसैन भारतीय राजनेता तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। वे संसद सदस्य तथा केन्द्रीय मंत्री के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं। वाजपेयी सरकार में सबसे युवा मंत्रियों में शामिल होते हुए उन्होंने नागरिक उड्डयन जैसे महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व सँभाला। वे बिहार तथा राष्ट्रीय विकास से सम्बद्ध मुद्दों पर एक प्रभावशाली आवाज़ के रूप में आज भी सक्रिय हैं।

संस्कृति के प्रति दृढ़ श्रद्धा एवं निष्ठा

परम्पराओं को सामर्थ्य प्रदान कर, भविष्य को प्रेरणा देना

अशोक कुमार सिन्हा हमारे क्षेत्र की अमूल्य कलात्मक और सांस्कृतिक परम्पराओं के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए समर्पित हैं। यह मंच स्थानीय शिल्पकारों के समर्थन, हमारी धरोहर के दस्तावेज़ीकरण और इन जीवंत परम्पराओं को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाने के प्रयासों को प्रस्तुत करता है। इसके साथ संलग्न वीडियो इस यात्रा और दृष्टि को और विस्तृत रूप में साझा करता है।

  • सांस्कृतिक संरक्षण
  • समुदाय की सक्रिय भागीदारी
  • स्थानीय शिल्पकारों का समर्थन
  • सांस्कृतिक धरोहर का प्रोत्साहन

अशोक कुमार सिन्हा द्वारा रचित कृतियाँ

शब्दों में क्षणों को कैद करने, कहानियाँ सुनाने और बदलाव को प्रेरित करने की शक्ति होती है। यह खंड अशोक कुमार सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तकों का संग्रह है, जिनमें से प्रत्येक समाज, संस्कृति, इतिहास और मानवीय अनुभवों पर एक अनूठा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इन प्रकाशित रचनाओं के माध्यम से उनकी साहित्यिक यात्रा का अन्वेषण करें।

सम्मान और पुरस्कार

पुरस्कार एवं उपलब्धियों की
एक झलक

बिहार सरकार कला संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा बिहार कला पुरस्कार (2019-2020) प्राप्त

प्रगति मैदान, नई दिल्ली में 14-27 नवम्बर 2014 तक आयोजित 34वे भारतीय अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेला में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक पाया |

प्रगति मैदान, नई दिल्ली में 14-27 नवम्बर 2018 तक आयोजित 38वे भारतीय अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेला में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक पाया |

प्रगति मैदान, नई दिल्ली में 14-27 नवम्बर 2019 तक आयोजित 39वे भारतीय अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेला में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक पाया |

लेख एवं विचार

कला, संस्कृति और समाज पर मेरे लेख

इस खंड में, अशोक कुमार सिन्हा कला, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक परिदृश्य पर अपने दृष्टिकोण साझा करते हैं। यह लेखों और विचारों का संग्रह है जो हमारी परंपराओं को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने के उनके जुनून को एक गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।